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Life in Deep Sea

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क्या संभव है समुद्र के गर्त में जीवन हम अक्सर अंतरिक्ष की बात करते हैं…आसमान में बसने के सपने देखते हैं…..और वैज्ञानिक भी लगातार इसकी तलाश में हैं कि पृथ्वी के बाहर किस ग्रह पर जीवन संभव हो सकता है….जिज्ञासा तो इसकी एक वजह है, लेकिन क्या धरती पर तेजी से बढ़ती जनसंख्या इसकी वजह नहीं है….क्या ऐसा नहीं लगता कि जिस तरह से विस्फोटक गति से पाॅपुलेशन बढ़ रही है……एक दिन ऐसा भी आएगा….कि इंसानों के रहने लायक जमीन खत्म हो जाएगी……तब….तब मानव कहीं और बसने की सोचेगा…..यही सोच हमे अंतरिक्ष को खंगालने पर मजबूर कर रही है….ऐसे में सवाल एक और भी उठता है….हम जीवन की तलाश अंतरिक्ष पर ही क्यों कर रहे हैं…..धरती के नीचे…..समुद्र के गहरे तल में क्यों नहीं….यहां भी तो जीवन संभवना हो सकता है। जी हां समंदर के अंदर। जहां तक पहुंचना अंतरिक्ष में जाने जितना ही मुश्किल है। तो दिल थाम कर बैठ जाइये और वीडियो को पूरा देखिये। क्योंकि इसके जरिये आप समंदर के अंदर जिंदगी के वो राज जानने वाले हैं। जिनके बारे में शायद आपने सोचा भी नहीं होगा। धरती की गहराई में जीवन की तलाश क्या कभी आपने समुद्र के गहरे झांकने की कोशिश की है…..गहराइयां क्या कहती हैं…..कैसी होती हैं…. क्या गहरे समुद्र में जीवन संभव होगा……अगर संभव है तो कैसा जीवन पनपता है….उन अथाह गहराइयों में…..ये बड़े ही दिलचस्प सवाल हैं……हम अक्सर धरती से ऊंचे आकाश में अरबों प्रकाशवर्ष दूर की बातें करते हैं….तो क्यों ना आज हम बात करें…. धरती से नीचे गहराई की….जिसे पौराणिक कथाओं में पाताल कहा गया है…..हमने अक्सर अपनी दादी नानी से आकाश और पाताल लोक….और वहां बसने वाले देवताओं की कहानियां सुनी है….. कहां है दुनिया की सबसे गहरी जगह हम आज जिस पाताल लोग की बातें करने वाले हैं….यानी धरती पर मौजूद सबसे सबसे गहरी जगह की…..जिसे मेरियाना ट्रेंच के नाम से जाना जाता है….. इसे धरती की सबसे गहरी खाई माना जाता है…..इसकी गहराई की तुलना हम पृथ्वी की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट से करें….तो इस गर्त में माउंट अवरेस्ट को डालने के बाद उसकी चोटी भी समुद्र तल से करीब डेढ़ किमी नीचे ही रह जाएगी…..वो जगह इतनी गहरी है, कि सूरज की रौशनी भी वहां नहीं पहुंची….यानी धुप्प अंधेरा…..और भयंकर सन्नाटा…….जहां आप खुली आंखों से भी कुछ नहीं देख सकते हैं…… समुद्र से 11 हजार मीटर नीचे कैसी है दुनिया अब सवाल ये उठता है कि समुद्र की उतनी गहराई में जहां सूरज की किरणें तक नहीं पहुंचती…..क्या वहां जीवन संभव है……मारियाना ट्रंच प्रशांत महासागर में स्थित मारियाना द्वीप समूह से करीब 200 किमी दूर पूर्व में स्थित है…..आप जानकर सकते में पड़ जाएंगे की मारियाना ट्रंच की गहराई समुद्रतल से 11 हजार मीटर से भी ज्यादा गहरा है….यानी करीब 11 किमी से ज्यादा….वहां जीवन है या नहीं ये जानने के लिए तो उन अथाह गहराइयों में उतरना होगा…..उस गहराई में जहां आपके ऊपर होगा 11 किलोमीटर गहरे पानी का प्रेशर…..जहां शरीर के हर इंच पर 8 टन का दबाव होगा….क्या मानव शरीर इतना दबाव सह पाएगा…..क्या वो समुद्र की इस गहरी दुनिया में खड़ा हो पाएगा…..बिल्कुल भी नहीं…..मानव शरीर में इतना दबाव झेलने की क्षमता नहीं है……बेशक इंसान इतना दबाव नहीं पाएगा…..तो इसका ये मतलब कतई नहीं है….तो क्या आज तक कोई नहीं पहुंचा…… अब तक पहुंचे हैं केवल 3 व्यक्ति इंसान सब कुछ छोड़ सकता है…जिज्ञासा करना और उसके राज को जानना नहीं छोड़ सकता….इसी जिज्ञासा के कारण समुद्र की गहराई में भी जाने को मजबूर कर दिया…..ये बात अलग है कि अब तक जहां दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला माउंट एवरेस्ट पर अब तक करीब 1000 लोगों ने सफलता पाई है…तो इसकी तुलना में महज 3 व्यक्ति ही दुनिया की सबसे गहरी खाई मरियाना ट्रेंच तक जा सके हैं…..यूएस के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट डॉन वॉल्श और उनके स्विस सहकर्मी, दिवंगत जैक्श पिकार्ड 1960 में एक पनडुब्बी में करीब 10,790 मीटर की गहराई तक गए थे जैम्स कैमरन ने तय किया खतरनाक सफर 11 किलोमीटर गहरे पानी के अंदर जहां का दबाव आपकी नसें फाड़ सकता है….इस दबाव तक पहुंचने का कारनामा भी कर दिखाया अमेरिकी फिल्म निर्देशक जैम्स कैमरन ने….टाइटेनिक और अवात जैसी फिल्मों के डायरेक्टर जैम्स कैमरन ने अपनी 12 टन वजनी पनडुब्बी….जो समुद्र के दबाव को झेलने के लिए खास तौर से बनायी गई थी….उन्हें ये पनडुब्बी बनाने में 7 साल लगे थे…..उसमें बैठकर अकेले मरियाना ट्रेंच की यात्रा कर वापस आ चुके हैं…..वे मेरियाना गर्त के तल पर लगभग 11,000 मीटर की गहराई तक उतरे ही नहीं….बल्कि फिल्म शूट कर आए समंदर में अंदर 1 हजार गुणा दबाव मिस्टर कैमरन ने उस अंधेरी दुनिया की कैसी और किस पर फिल्म बनाई होगी….उस सामुद्रिक रेगिस्तान में क्या उन्होंने कहीं जीवन देखा….क्या वो आम इंसानों की कल्पना की तरह ही अद्भूत थी…..या फिर कैमरे ने सिर्फ अंधेरे को ही कैद किया……कहतें हैं ना परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हो….जीवन अपना रास्ता ढूंढ ही लेती है…..फिर चाहे खुद को ही क्यों ना बदलना पड़े….बीच जब अंकुरित होता है….कितना कोमल….कितना नाजुक होता है….लेकिन धरती को फाड कर बाहर आ ही जाता है….ठीक उसी तरह उस अथाह गहराई में….जहां का दबाव इंसान को जीवित रहने की चंद मोहलत भी नहीं देता…..वहां भी जीवन है……इस खाई के अंदर का दबाव समुद्री सतह के दबाव के मुकाबले 1000 गुना ज्यादा है…..इस हालात में भी यहाँ कई प्रकार के जीव जंतुओं का है….. अजीबोगरीब होती है शारीरिक संरचना बायोलॉजिकल अडॉपटेशन के कारण यहां जीवों में ऐसी शारिरीक संरचनाएं विकसित हुई जो ना केवल अथाह दबाव झेलने में सक्षम हैं…बल्कि इस प्रतिकूल परिस्थिति में इनके जिंदा रहने में मददगार साबित होती है…..कुछ की तो आंखें ही नहीं थी….इस धुप्प अंधेरे में आंखों का काम ही क्या है….तो कुछ बायो लुमिनेशन्स की मदद से अपने सिर के ऊपरी हिस्से में लाइट लिए घूम रहे थे……ये वो जीव हैं….जो इसी मेरियाना ट्रेंच के इसी प्रेशर

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